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नई दुनिया हेल्थ, रायपुर, अगस्त 2012                                       मूत्रमार्ग

                                                           

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पेषाब नली की सिकुड़ न हुई दूर एक छत्तीसग वर्षीय महिला गत चार वर्षो से यूरेथ्रल स्ट्रीक्चर (पेशाब नली में सिकुड़न) की समस्या से ग्रसित थी। समस्या प्रारंभ पेशाब के पहले तथा पेशाब के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द से हुआ। धीरे-धीरे पेशाब कम मात्रा में होने लगी तथा पेशाब करते समय उन्हें बहुत जोर लगाना पड़ता था। यह समस्या क्रमशः बढ़जी जा रही थी। उन्होंने प्रारंभ में इस समस्या के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया जिन्होंने प्राथमिक जाँच के उपरांत इस केस को यूरोलाॅजिस्ट को रैफर किया। प्राथमिक जाँच के उपरांत इस केस को यूरोलाॅजिस्ट ने सिस्टोस्कोपी करवाने की सलाह दी, जिसमें उन्हें यूरेथ्रल स्ट्रीक्चर की समस्या का होना निश्चित हुआ, जो कि यूरेथ्रा के डिस्टल हाफ में डेंस यूरेथ्रल स्ट्रीक्चर के रूप में मौजूद थी। इस वजह से यूरोलाॅजिस्ट ने सिस्टोस्कोपी के साथ ही यूरेथ्रल डायलेटेशन भी किया ताकि शेष बची हुई यूरीन को ब्लेडर से बाहर किया जा सके।

 

डायलेटेशन ने मरीज को तत्काल लाभ प्रदान किया तथ्ज्ञा अगले लगभग डेढ़-दो माह तक उन्हें कोई समस्या नहीं हुई। 2 माह बाद उन्हें पुनः उक्त समस्या थोड़ी-थोड़ी महसूस होना प्रारंभ हुई। धीरे-धीरे यह समस्या पुनः बढ़ने लगी, जिससे परेशान होकर वह महिला पुनः यूरोलाॅजिस्ट से मिली। यूरोलाॅजिस्ट ने उन्हें पुनः डायलेटेशन करवाने की सलाह दी। अगले एक वर्ष तक यही क्रम बना रहा, जिस दौरान उन्हें 10 से 12 बार डायलेटेशन करवान पड़ा। उनकी समस्य क्रमशः बढ़ती जा रही थी, साथ ही बार-बार का डायलेटेशन इस महिला को भावनात्मक रूप से भी परेशान करने लगा। अब ना तो वह घर का काम ठीक से कर पा रही थी और ना ही ठीक से बच्चों की देखभाल कर पा रही थी। अंततः उन्होंने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति अपनाने का निर्णय किया। विस्तारपूर्वक केस हिस्ट्री लेने के पश्चात् उन्हें कार्सीनोसीन नामक दवा दी। दवा प्रारंभ करने के बाद एक महीने में उनके पेट के निचले हिस्से का दर्द लगभग पूरी तरह ठीक हो चुका था तथा अब पेशाब के लिए जोर भी कम लगाना पड़ता था धीर-धीर उनकी स्थिति में लगातार सुधार होता गया । गत एक वर्ष से उन्हें डायलेटेशन की आवश्यकता तीन से चार माह में एक बार तक कम हो चुकी है ।

   

 

हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

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