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 नई दुनिया,हेल्थ रायपुर,2 मई 2009                                                                       टांसिल

                                                             

               

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      टांसिल का इलाज होम्योपैथी में

                       टांसिल गले में पाये जाने वाला लिम्फाॅइड टिशु (रक्षात्मक कोशिकाएँ) हैं। इनका मुख्य कार्य शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है। टांसिल वाॅल्डेयर रिंग का एक हिस्सा है, जो इन्फेक्शन को गले के माध्यम से सीधे फेफड़ों तक या रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोकते हैं। टांसिल का इलाज होम्योपैथी में आसानी से संभव है।

   ठंडी चीजों से बढ़ती है तकलीफ
         
ये सही है कि ठंडी चीजें खाने से टांसिल बढ़ जाती है। इन चीजों को खाने से गले एवं टांसिल की बाहरी सतह का तानमान कम हो जाता है इस वजह से टाॅन्सिल्स में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है तथा यही इन्फेक्शन होने का कारण होता है।


Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 
प्रारंभिक अवस्था में क्या करें ?
  • गर्म पेय पदार्थ आपको आराम दे सकती है।
  • गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा करें।
  • ये इन्फेक्शन से रोकता है।
  • ठंडे पदार्थो के सेवन से बचें।

इन्फेक्शन के कारण

  • सर्दी अथवा साइनस का इन्फेक्शन-सर्दी नाक में से बहकर गले की ओर आती है और इस तरह टांसिल में भी इन्फेशन होता है।
  • शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी।
  • कुपोषण आदि।

 लक्षण

  • गले में छिला हुआ सा लगना।
  • गले में दर्द खासतौर पर निगलने में।
  • आवाज का भारीपन आदि।

बच्चों में समस्या

                          जन्म से लेकर पाँच वर्ष की आयु तक के बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता का विकास निरन्तर होता है। टांसिल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। अनेक बच्चों में टांसिलके बार-बार बढ़ जाने एवं उनमें इन्फेक्शन होने की समस्या पायी जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चें में तेज बुखार, भूख न लगना आदि लक्षण पाए जाते है। भूख में कमी की वजह से गले में निगलते वक्त होन वाला इन्फेक्शन प्रतिरोधक क्षमता में कमी को प्रदर्शित करता है।
 

हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

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