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                                                                                                                  स्वाईन फ्लू

                                                              

 

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Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 

स्वाईन फ्लू एक प्रकार का मौसमी (वायरल) संक्रमण हैं। यह प्रतिवर्ष होने वाले मौसमी संक्रमण का ही दूसरा प्रकार है । जो कि भ्प्छ1 वायरस द्वारा हो रहा है। जबकि समान्यता यह भ्प्छ19 प्रकार का वायरस होता हैं।

संक्रमण का मार्ग:-

  • मुख

  • नाक

  • आंख

संक्रमण कैसे होता हैं:-

संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, उसके छींक/खासी/आदि स्राव से तथा उनसे हाथ मिलाने से ।

   किनमें संक्रमण की संभावना अधिक है:-
  • 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
  • 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग।
  •  ऐसे वयस्क जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो।

   लक्षण:-

      सर्दी, खांसी, बुखार, हाथपैर दर्द, उल्टी, कमजोरी, झटके, सांस की तकलीफ इत्यादि।

    बचाव -

  • अपने आसपास स्वच्छता रखें।
  • भीड़ से बचे। आवश्यक ना हो तो अस्पताल भी ना जाएं।
  • हाथ डेटॅल, सेवालॅन, डिजर्जेंट या स्पीरिट से धोएं।

    होम्योपैथी किस प्रकार कर सकती है असर -

  महामारी के नियंत्रण में होम्योपैथी का महत्वपूर्ण स्थान हैं। पिछले कुछ वर्षों में चिकनगुनिया, सार्स आदि इनके उदाहरण है। स्वाईन फ्लू इससे पूर्व  1में यूरोप तथ्ज्ञा 1975 में अमेरिका में महामारी के रूप में आ चुका है जिसका होम्यौपैथी दवाओं से सफलतापूर्वक उपचार किया गया था। इस समय जैल्सेमियम तथा ब्रोयोनिया अल्बा मुख्य रूप से लाभकारी पायी गयी है। उचित दवा का चुनाव स्थान की भौगोलिक तथा वातावरणीय स्थिति तथा लक्षणों  के आधार पर किया जाना है। वर्तमान संदर्भ में आॅसी-काॅक्यूलिनम तथा इनफ्यूएनजिनम नामक दवाएं अधिक उपयुक्त पायी गई हैं।

    स्वाईन फ्लू से जुड़ी कुछ भ्रांतियां एवं तथ्य:-

     
 

वस्तुतः यह एक आम वायरल इन्फेक्शन की तरह ही हैं। मृत्यु का कारण वायरस द्वारा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को घटा देने के वजह से होने वाले दूसरे बैक्टीरियल इन्फेक्शन हैं। समय से ईलाज करवाने पर यह 100 प्रतिशत ठीक हो जाने वाली बैक्टीरियल संक्रमण हैं। ध्यान रखें आज भी भारत में मलेरिया और  टी.वी.  से मरने वालों की संख्या, स्वाईन फ्लू से मरने वालो की तुलना में कई गुना अधिक हैं। अतः भयभीत ना हो, समझदारी से काम ले।  
हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

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