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 नई दुनिया,हेल्थ ,रायपुर 10 June 2007                                              तनाव                    

                                                             

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 नकारात्मक सोच से बढ़ता है तनाव
                      
                                                तनाव किसी भावनात्मक रूप से विचलित कर देने वाली स्थिति में शरीर द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया है। जब व्यक्ति ऐसी किसी परिस्थिति का सामना करता है, तब वह उससे भावनात्मक रूप से प्रभावित हो जाता है। इससे शरीर के विभिन्न न्यूरो हाॅर्मोनल  प्रतिक्रिया के तौर  पर   अलग-अलग रायानिक तत्वों का स्राव करते हैं। इसकी वजह से बीवी, धड़कन, गहरी साँसों का चलना एवं निद्र  संबंधित अनियमितताएँ उत्पन्न  होती है, जो तनाव का कारण बनती हैं। कुछ  मात्रा में तनाव व्यक्ति के दैनिक जीवन का हिस्सा होता है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे है, होम्योपैथी विशेषज्ञ डाॅ. मिकीन जैन।


Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 



 
 तनाव के कारण

                आज की इस प्रतिस्पर्धा जीवन शैली में व्यक्ति सदैव तनावग्रस्त रहता है। तनाव के बहुत  से कारण हो सकते है,  जैसे अत्यंत   इंडिविजुवल   होना, जटिल बीमारी,  परिवार से बिछुड़ना,  तलाश,  आर्थिक   कठिनाईयाँ व अपूर्ण महत्वाकांक्षाएँ कई बार विवाह, संतान का जन्म अथवा रिश्तेदारों की खातिरदारी जैसे खुशी के मौके भी तनाव का कारण बन जाते हैं। यहाँ एक बात समझना सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं कि एक व्यक्ति के लिए सामान्य सी लगने वाली बात किसी दूसरे व्यक्ति को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर देेने वाली हो सकते है,

लक्षण:-

  • मांसपेशियों में खिंचाव, विशेषकर गर्दन एवं पीठ के दर्द की शिकायत ।

  • अत्यधिक चिड़चिड़ापन एवं बात-बात में गुस्सा होना।

  • नकारात्मक सोच।

  • धड़कन, एसीडिटी, भूख न लगना, वजन कम होना।

ऐसे करें दूर

  • स्वयं को तनाव मुक्त करें। अपनी व्यक्त दिनचर्या में से स्वयं के लिए कुछ वक्त निकालें । धीरे-धीरे बोलें एवं चलें। कोई भी कार्य निर्धारित समय सीमा में हो सके, इसके लिए स्वयं को समय दें।

  • लोगों से संवाद स्थापित करें एवं अपनी परेशानी बताएँ। अपने प्रियजनों के साथ समय बिताएँ।

  • संगीत, मेडीटेशन, खेल आदि को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ।

  • नियमित रूप से थोड़ी देर व्यायाम करें।

होम्योपैथी है मददगार

                                      होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो रोग नहीं, अपितु रोगी का उपचार करती हैं। तनाव की वजह, उसका शरीर पर प्रभाव एवं तनावग्रस्त व्यक्ति की मानसिकता दवा के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। होम्योपैथी दवाओं के सेवन से शारीरिक तकलीफों में शीघ्र आराम तो प्राप्त होता ही हैं साथ ही अतिरिक्त लंबे समय तक दवाओं का सेवन व्यक्ति के तनाव सहन करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करता हैं। यह व्यक्ति को नशीले पदार्थो के सेवन आदि से बचाता हैं। आॅरम-मेटालिकम, जेल्सेयिम, नैट्रम-मूर,कालीफॅास, आर्निंका आदि दवाएँ ऐसे रोगियों के निए लाभप्रद पाई गई हैं। पर सही दवा के चुनाव के लिए रजिस्टर्ड होम्योपैथी प्रेक्टिशनर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
 

हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

  

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