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 नई दुनिया,हेल्थ , रायपुर ,मई 2008.                                                                              सोरायसिस

 

 

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Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 

    सोरायसिस एक जटिल रोग है जिसका इलाज बहुत ही कठिन हैं। चूंकि यह बीमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने पर हमला करती है इसलिए होम्योपैथी चिकित्सा में इस शक्ति को बढ़ाने के लिए इलाज किया जाता हैं।

                          एक पच्चीस वर्षीय युवती अपनी माताजी के साथ हमसे सोरायसिस की समस्या लेकर मिलने के लिए आई। वो पिछले कई वर्षों से इस बीमारी से ग्रस्त थी। इसके लिए अपने स्तर पर उन्होंने अनेक प्रयास किया। चर्मरोग विशेषज्ञ से मिले, कई प्रकार की दवाएँ तथा मल्हम बदल-बदल कर लिए। विशेष लाभ न मिलने पर आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन भी किया ।

             किसी शुभचिंतक की सलाह पर उन्होंने गौमूत्र का सेवन भी लगभग 6 माह तक किया । अपेक्षित परिणाम न मिल पाने की वजह से उन्हें अत्यंत निराशा तथा दुःख था अंतत थककर उन्होंने सभी प्रकार की दवाएँ बंद कर दी। पर उम्र बढ़ते के साथ परिवारजनों को भवष्यि की चिंता सताने लगी। इस स्थिति में किसी ने उन्हें होम्योपैथी चिकित्सा की सलाह दी। माताजी के दबाव की वजह से वह युवती हमारे पास आई। केस हिस्ट्री लेने पर हमने जो महत्वपूर्ण बात पाई वह थी घर के सदस्यों का उस युवती के प्रति नकारात्मक व्यवहार था। उन्हें डर था कि यह बीमार घर के अन्य लोगों तक भी फैल सकती है। उनकी इन भ्रांतियों को दूर करने हेतु हमने उन्हें बताय कि सोरायसिस आनुवांशिकता पर आधारित एक आटोइम्यून बीमारी है जो कि त्वचा पर पड़ने वाले लाल धब्बों के रूप में प्रदर्शित होती हैं। जिस पर सफेद पपड़ी सी जम जाती है। इसके विभिन्न प्रकार होते है, जिन्हें मुख्यतः चमड़ी पर दिखने वाले धब्बों के प्रमाण तीव्रता, उनकी लालिमा, खुजली आदि का आकलन करके इस आधार पर इन्हें वर्गीकृत किया गया है। परिवार के बुजुर्ग सदस्यों ने समस्या समझने के बाद अपने व्यवहार में परिवर्तन किया। लक्षणों में समानता के आधार पर युवती को ग्रेफाइटिस नामक दवा दी साथ ही गे्रफाइटिस का मलहम भी लगाने को दिया तथा बीच-बीच में इंटरकरेंट के रूप में थूजा नामक दवा दी। इसके अतिरिक्त उन्हें प्रतिदिन योगा करने की सलाह दी गई। अभी उनकी स्थिति पहले से काफी बेहतर हैं।

क्या सोरायसिस छूत की बीमारी है?  

नहीं। सोरायसिस छूत की बीमारी नहीं हैं यद्यपि सोरायसिस के धब्बों को देखने ऐ ऐसी शंका अवश्य उत्पन्न होती है, पर सोरायसिस से संक्रमित व्यक्ति अन्य स्वस्थ व्यक्तियों को इस बीमारी से संक्रमण नहीं करता हैं।

इसका कारण क्या है ?    निम्न में से कोई भी स्थिति सोरायसिस को अवक्षेपित कर सकती हैं।

  • . भावनात्मक कारण, तनाव, भय, चिंता, चिड़चिडाहट आदि।
  • किसी प्रकार का त्वचा का संक्रमण तथा सन बर्न आदि।
  • अन्य शारीरिक संक्रमण।
  • कुछ दवाएँ (एलोपेथिक)।
  •  हार्मोनल परिवर्तन।
  • धूम्रपान।

  सोरायसिस में क्या होता है ?
        यह वस्तुतः कोशिकाओं के असामान्य ग्रोथ की वजह से होता है। सामान्यतः त्वचा की कोशिकाएँ पूर्णतः परिपक्व होने में 28-30 दिन का समय लेती है। सोरायसिस में यह समय घटकर मात्र 3 से 5 दिन रह जाता है। अतः ये कोशिकाएँ तेजी से त्वचा की बाहरी सतह की ओर एकत्रित होने लगती है तथा इस प्रकार सोरायसिस का लीजन बनता हैं।

 सोरायसिस कितने दिनों तक रह सकता है:

इसकी कोई निश्चित समय सीमा नहीं हैं और ना ही ऐसे कोई मापदंड है जिनके आधार पर कोई अनुमान लगाया जा सके।

इन बातों को ध्यान रखें।

  • सोरायसिस से ग्रसित व्यक्तियों को खुजली आने पर सदैव हल्के हाथ से त्वचा को सहलाना चाहिए। ज्यादा जोर से खुजली करने अथवा नाखून लगने से त्वचा को जो क्षति पहंुचती है वो नया लीजन बना सकती हैं।
  • त्वचा के किसी भी दूसरे संक्रमण को रोकने के लिए उचित सफाई रखें।
  •  ठंड के मौसम में त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए माॅश्चराइजर कोल्ड क्रीम आदि का प्रयोग करें। ध्यान रखे त्वचा का रूखपान अधिक खुजली उत्पन्न करता है।
  • स्नान के बाद टाॅवेल से धीरे-धीरे शरीर को सुखाये, रगड़े नहीं।
हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

 

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