HOME

 नई दुनिया, हेल्थ ,रायपुर ,नवम्बर 2009                                               बच्चों में अतिचंचलता

                                                               Print

   
                       बच्चों में अतिचंचलता एवं होम्योपैथी यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का व्यवहार अनेक समस्याओं को प्रदर्शित करता है, जो कि एकाग्रचित्तता की कमी के साथ जुड़ी होती है। यह बच्चों से जुड़ी हुई  अत्यंत ही सामान्य स्थिति है जो मोटे तौर पर हर 100 में से 3-4 बच्चों में पाई जाती है यह समस्या मुख्यतः निम्न कारणों से होती है। ध्यान केन्द्रित ना कर पाना , अतिचंचलता , उत्तेजानात्मक व्यवहार .

किस तरह पहचान सकते है ?

ध्यान केंन्द्रित ना कर पाना

  • बच्चा किसी भी कार्य व खेल को पूरा नहीं कर पाता है। सामान्यतः उन्हें बीच में ही अधूरा छोड़ देता है।


Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 

 
  • कार्य करते समय अथवा खेलते समय (अपना ध्यान पूरी तरह केन्द्रित नहीं कर पाता जिसकी वजह से) लापरवाही बरतता है।
  • बच्चा दिए गए आदेशों का पूर्णतः पालन नहीं कर पाता। वह ऐसी गतिविधियों से बचने की कोशिश करता है जिनमें लगातार मानसिक प्रयास की आवश्यकता होती है जैसे की होमवर्क करना।
  • अपने दैनिक कार्यो को भी भूल जाता है।
  • बड़ी आसानी से ध्यान भंग हो जाता है।

अति चंचलता

  • अत्यधिक दौड़ना व वस्तुओं पर चढ़ना।
  • कक्षा में अपनी जगह बार-बार छोड़ देता है। जबकि उसे बार-बार जगह में बैठने की हिदायत दे रहे होते है।
  • खेलते वक्त जोर-जोर से चीखना।
  •  बैठने पर भी हाथ-पैर हिलाते रहना।

उत्तेजनात्मकता

  • बच्चा सवाल पूरा करने से पहले ही जवाब देना शुरू कर देता है।
  •  वह खेल खेलते समय अपनी बारी आने तक का इंतजार नहीं कर पाता है।
  • लगातार बोलते जाना और माना करने के बाद भी नहीं सुनना।

 ऐसी स्थिति में अभिभावक क्या करें ?

             ऐसी स्थिति में क्या यह यह समस्या वस्तुतः एडीएचडी को ही प्रदशर््िात कर रही है अथवा नहीं इस बात का सही पता एक कुशल चिकित्सक ही लगा सकता है। उसके सही निदान के लिए शिक्षकों के आकलन को महत्वपूर्ण स्थान किया जाता है। इसके लिए कोई शारीरिक जाँच नहीं होती । संदेह की स्थिति में क्लीनिक सायकोलाॅजिस्ट की सहायता ली जा सकती है। एक बार सही निदान हो जाने की स्थिति में सर्वाधिक महत्वपूण जिम्मेदारी अभिभावको की होती है। ऐसी स्थिति में उनका समझदारी भरा संतुलित व्यवहार बच्चों को अत्यंत यादगार साबित हो सकता है। बच्चे को बात-बात में डाँटना, मारना अथवा उसकी हर गलती को नजर अंदाज करना दोनों स्थिति समस्या को और अधिक जटिल बना सकता है।

होम्योपैथी किस तरह है कारगर
            होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति इस स्थिति में अत्यंत मददगार साबित हो सकती है। काॅन्स्टीट्यूशनल होम्योपैथी ट्रीटमेंट मस्तिष्क के उच्च केन्द्रों में उचित समन्वय स्थापित करने में मदद प्रदान करता है। इसमें अतिरिक्त बाहा्र वातावरण के स्टीमुलस के प्रति होने वाली प्रतिक्रिया भी नियंत्रित होती आधार पर किया जाता है, जिसके लिए विस्तृत केस हिस्ट्री की आवश्यकता होती है। कैमोकिला, थेरीडियाॅन कार्सीनोसीन, मैग्नेशियम आदि दवाएँ जब उचित पोटेंसी तथा रिपीटिशन में दी जाती है तो ये निश्चित रून से सकारात्मक प्रभाव प्रस्तुत करती है। सही दवा का चुनाव सिर्फ लीफाईड रजिस्टर्ड होम्योपैथी ही कर सकता है। इसके अतिरिक्त मैनेजमेंट के आवश्यकतानुसार सायकोथैरेपी, आॅक्यूपेशनल लिया जा सकता है। ं यहाँ यह ध्यान रखें कि आधुनिक परिवेश में बढ़ते हुए बच्चों को एक साथ अनेक स्टीम्युलम (संवेदनाओं) के साथ सामंजस्य स्थापित करना पड़ता है। बच्चे सीखने के लिए अपनी पाँचों इन्द्रियों आँख, कान, नाक, त्वचा, जीभ का प्रयोग करते है। कुछ बच्चों के न्यूरोफीजियोलाॅजिकल सिस्टम ऐसा नहीं कर पाते हैं और इस तरह के लक्षण प्रस्तुत होते है। इस स्थिति का सही प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ते बच्चे में मानसिक विकास एक सतत् प्रक्रिया है जिसमें ध्यान लगा पाने की क्षमता (अटेन्शन) का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके उचित प्रबंधन द्वारा ही बच्चा सही तरीके से सीख कर उसे मस्तिष्क में समायोजित कर पाएगा जो कि उसकी भविष्य की शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ते बच्चे में मानसिक विकास एक सतत् प्रक्रिया है जिसमें ध्यान लगा पाने की क्षमता (अटेन्शन) का महत्वपूर्ण स्थान है। इनके उचित प्रबंधन द्वारा ही बच्चा सही तरीके से सीख कर उसे मस्तिष्क में समायोजित कर पाएगा जो कि उसकी भविष्य की शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में मरीज के संपूर्ण लक्षणों और उसके व्यक्तित्व की बारीकियों का अध्ययन किया जाता है तब किसी दवा का चयन होता है। इसीलिए इस पद्धति से चिकित्सा में सफलता चिकित्सक के अनुभव पर अधिक निर्भर होती है।
 

हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

 v

<meta name="msvalidate.01" content="" /><meta id="MetaDescription" name="DESCRIPTION" content="Doctor/Medical Specialists with specialisation in HOMEOPATHY in RAIPUR" /><meta id="MetaKeywords" name="KEYWORDS" content="Homeopathy doctor in RAIPUR, , Bestdoctor in RAIPUR" /><meta name="googlebot" content="INDEX, FOLLOW" /><meta name="YahooSeeker" content="INDEX, FOLLOW" /><meta name="msnbot" content="INDEX, FOLLOW" /><meta name="DISTRIBUTION" content="GLOBAL" /><meta name="ROBOTS" content="INDEX,FOLLOW" /><meta name="REVISIT-AFTER" content="1 DAYS" /><meta name="RATING" content="GENERAL" /><meta id="MetaGenerator"name="GENERATOR" content="DotNetNuke " /><meta http-equiv="PAGE-ENTER" content="RevealTrans(Duration=0,Transition=1)" /><metaname="viewport" content="width=device-width, maximum-scale=1.0, minimum-scale=1.0" /><meta http-equiv="X-UA-Compatible"content="IE=EmulateIE9" />