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 नई दुनिया,हेल्थ ,रायपुर ,मार्च 2008।                                                          लर्निंग डिसएबिलिटी

                                                             

   

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       बढ़ते हुए बच्चों की समस्याओं की पालकों के लिए समझना आसान नहीं होता। अक्सर जब भी बच्चा सीखने में सामान्य से अधिक देर लगा रहा हो तो संभव है कि उसे लर्निंग डिसएबिलिटी की समस्या हो। पालक बच्चे के क्लास में फेल होने पर भी उसे चिकित्सा के पास ले जाना उचित नहीं समझते। लर्निंग डिसएबिलिटी यानी सीखने की अक्षमता अभी चिकित्सा विज्ञान के लिए भी अभी तुलनात्मक रूप से नई खोज है। आमतौर पर ऐसे लोगों को पढ़ने, लिखने, स्पेलिंग बनाने अथवा गणित में समस्याएँ होती है। इस स्थिति में पालक अपने बच्चों के लिए ये शिकायते करते है।

  •  मेरी 10 वर्षीय पुत्री प्रिया को पढ़ना बिल्कुल नापसंद है। वह बहुत धीरे-धीरे पढ़ती है। तथा शब्दों का स्पष्ट उच्चारण नहीं कर पाती है।

  • मेरे बेटे की लिखने की स्पीड बहुत कम है। उसकी टीचर हमेशा स्पेलिंग मिस्टेक की शिकायत करती है।


Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 

 
  • मेरा बेटा पढ़ने में तो बहुत तेज है। उसे याद भी जल्दी होता है पर लिख नहीं पाता। पेपर पूरा नहीं लिख पाता। हालांकि उसको आता सब कुछ है। पूछने पर तो वह सब कुछ सही बताता है, पर लिखने मेें कमजोर है।

 महत्वपूर्ण तथ

  • यह सभी उम्र तथा वर्ग में हो सकता है।
  • यह सभी समाज तथा आर्थिक स्थिति में हो सकता है।
  • यह मानसिकता अक्षमता नहीं है। वस्तुतः ऐसे बच्चों के बौद्धिक सूचकांक अधिक होता है।
  •  इसके साथ व्यवहार संबंधित समस्याएँ जैसे कि आति चंचलता आदि समस्याएँ हो सकती है।
  • यह प्राथमिक रूप से व्यक्तित्व के भावनात्मक, मानसिक तथा व्यावहारिक विकास के समय होने वाले विचलन की वजह से होता है, जो बच्चे को घर तथा स्कूल मे समायोजित नहीं होने देते है।
लर्निंग डिसएबिलिटी के प्रकार
  • पढ़ने में समस्या (डिसलेक्सिया) इसमें पढ़ते समय बच्चा शब्द को ध्यान पूर्वक पूरा करने के बजाए पहले अक्षर के आधार पर शब्द का पूर्वानुमान (अंदाज) लगाता हैं। इस, वजह से धीरे-धीरे पढ़ पाना, शब्द के अक्षरों को भूल जाना, नए शब्द स्वतः जोड़ना, आदि समस्याएँ प्रस्तुत होती हैं।
  •  लिखने की समस्याएँ (डिसग्राफिया) लिखने समय स्पेलिंग मिस्टेक, अक्षरों का रिवर्सल आदि सामान्य समस्या है। इसके अतिरिक्त वाक्य के निर्माण (सिन्थेसिस) काल (टेन्स) आदि में गलती पाई जाती है।
  • गणित संबंधी समस्याएँं ( डिसलेक्सि) इसमें सामान्य जोड़ने या घटाने आदि में गलतियाँ होती है। चूँकि ऐसे बच्चे में सामान्य बौद्धिक तर्क क्षमता कमजोर होती है अतः इसमें अंदर ऊहापोह और अनिश्चितता अधिक होती है।

अभिभावक क्या करें

 ऐसी स्थिति में आपको अत्यन्त समझदारी तथा धैर्य रखकर बच्चे की समस्या को समझना चाहिए। बार-बार डाॅटना, मारना अथवा अन्य बच्चों से तुलना करना न सिर्फ आपके बच्चे को हतोत्साहित करेंगी, बल्कि उसके सेल्फ काॅन्फिडेस पर भी विपरीत प्रभाव डालेगी। इसके अतिरिक्त घर के सदस्यों का आपसी सामंजस्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्कूल में बच्चे के साथ होने वाले व्यवहार के प्रति भी सावधानी रखनी चाहिए। भोजन से संबंधित सावधानी ऐसे बच्चों को जहाँ तक संभव हो डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ तथा पेय पदार्थ ना दें, इनमें उपस्थित प्रिजर्वेटिव पदार्थ नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है।

होम्योपैथी किस तरह है कारगर

ऐसी स्थिति में होम्योपैथी अत्यंत कारगर है। चूँकि होम्योपैथी में व्यक्तित्व विशेषता के आधार पर चिकित्सा की जाती है अतः यह डिसलेक्सीय, डिसग्राफिया, डिसकेलुकुलिया आदि में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इससे बच्चे के मस्तिष्क के उच्च केंद्र जो सोचने और समझने का कार्य करते है में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। बच्चे व्यक्तित्व में पाए जाने वाले विशेष लक्षणों के आधार पर दवा का चुनाव किया जाता है। इसके अतिरिक्त बच्चे को पूर्व में हो चुकी बीमारियाँ तथा परिवार में पाई जाने वाली किसी भी आनुवांशिक बीमारी का भी आंकलन किया जाता है। इस प्रकार चुनी हुए दवा को जब उचित पोटेंसी तथा बार बार दिया जाता है। तब वांछित परिणाम अवश्य प्राप्त होते हैं। इस स्थिति में सामान्यतः उपयोगी दवाएँ लायकोपोडियम, लैकेसिस, स्ट्रामोनियम, मेडोराइनम आदि है।

  
हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

  

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