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                                                                                                                 क्या आपका बच्चा बिस्तर गीला करता हैं ?

                                                             

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बच्चें का बिस्तर गीला करना (पेशाब कर देना) एक आम समस्या हैं। सामान्यतः बच्चे 4-5 वर्ष तक पेशाब में नियंत्रण रखना (नींद के दौरान) सीख चुके हैं। इस उम्र तक लगभग 75 प्रतिशत बच्चे नींद के दौरान ब्लेडर कंट्रोल में पारंगत हो चुके होते हैं। कुछ बच्चे 7 वर्ष तक यह सीख पाते हैं।

प्रकार:-

  •  प्राईमरी:- इसमें बच्चा जन्म से कभी भी पूर्णतः ब्लेडर कंट्रोल नहीं कर पता हैं
  • सेकंडरी:-  इसमें बच्चा 4-6 महीन या ज्यादा समय तक ब्लेडर कंट्रोल सीखने के बाद  किसी कारणवश पुनः नियंत्रण खो बैठता हैं।


Dr.Mikin Jain was a
Co-Chairperson at

"State level Homeopathy Workshop"

Organised by Health Department of India.

Clinic Timings

Monday - Friday
Morning

11.00 a.m to 1.30 p.m.

Evening

6.00 p.m to 9.00 p.m


Residential Address Timings:-

Morning upto 11.00 a.m
Evening 4.00 p.m to 6.00 p.m

On every saturday & sunday
By Appoinment only.


 

     कारण:-
          
             न्यूरोलाॅजिकला:-
ब्लेडर कंट्रोल में मस्तिष्क एवं ब्लेडर के बीच संवेदनाओं के आदान-प्रादान द्वार समन्वय स्थापित किया जाता है, जिसके द्वारा पेशाब की शंका होना, पेशाब रोकना एवं करना आदि को नियंत्रित किया जाता है। जिन बच्चों में यह समन्वय यही रूप से स्थापित नहीं हो पाता वे उक्त  समस्या से ग्रसित रहते हैं।   


आनुवांशिक:-

मेडिकल रिसर्च में यह पाया गया है कि माता-पिता को बचपन में बेड पेटींग की समस्या होने पर बच्चें में भी इसकी संभावना बढ़ जाती हैं।

भावनात्क कारण:-

 तनाव, डर, भय, आदि भावनात्मक कारण भी इस समस्या विशेषतः सेकंडरी बेड पेटींग की वजह हो सकते हैं।

अन्य:-

अतिचंचलता एवं एकाग्रचितता में कमी , इनफेक्शन, एलर्जी आदि।

प्रभावः

सामान्यतः यह पाया गया है कि इस समस्या से ग्रसित बच्चों के प्रति अभिभावकों, परिवार के अन्य सदस्यों, मित्रों आदि का व्यवहार डाॅटने, सजा देने, चिढ़ाने आदि रूप में सामने आता हैं। इन सब कारणों की वजह से बच्चे की समस्या तो दूर  नहीं  होती है पर उनके व्यक्तित्व   में नकारात्मक   प्रभाव जरूर डाल सकती है। यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि कोई बच्चा जान बूझकर बेड पेटींग नहीं करता । अतःपरिवार के सदस्यों का समझदारी भरा व्यवहार बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है।

   होम्योपैथी:-   

                                  

 होम्योपैथी एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है, जिसमें लक्ष्णों की समानता के आधार पर दवा का चुनाव किया जाता हैं। होम्योपैथी दवाओं के द्वारा बेड पेंटींग के सारे कारणों को संशोधित किया जा सकता हैं। काॅस्टीट्यूशनल सिमिलियमम देने पर न्यूरोलाॅजिकल डेवेलपमेंट को स्टीम्यूलेट किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अतिचंचलता आदि को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता हैं। इस स्थिति में  काॅस्टीट्यूशनल दवा के रूप में कैलकेरिया कार्वबरायटा कार्व, आदि  इंटरकरेट के रूप में ट्यूबरक्यूलीजम,  सल्फर  आदि तथा फेजिक दवा के रूप में  बेलाडोना, सीना,  कैमोमिला आदि प्रभावी पायी गयी है। सही दवा का चुनाव क्वालीफाईट होम्यो फिजीशीयन लक्ष्णों के आधार पर करता हैं। बच्चों में होम्योपैथी दवा लेने की स्वीकार्यता हमेशा अधिक होती है। अतः होम्योपैथी अपनाकर आप अपने बच्चे को स्वस्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।

हम से होम्योपैथिक उपचार की जरूरत मरीजों - दमा, गठिया, आत्मकेंद्रित, बांझपन, PCOD, दूध एलर्जी, IHD, एआर, एमआर, यूके, सिर दर्द, अनिद्रा आदि जैसे कोई पुरानी बीमारी, के लिए
 

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