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1-       हरीभूमि,10 अप्रैल ,2012 ।                                                          आॅटिज्म

                                                             

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आॅटिज्म एक अवस्था को दर्शाता है जिसमें मष्तिक का विकास प्रभावित होता है। इस समस्या से ग्रसित बच्चा अपने वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता। यह मूल रूप से संवाद स्थापित न कर पाने की वजह से होता है। इस वजह से बच्चा वातावरण के अन्य भागों जैसे कि वस्तु, व्यक्ति आदि के साथ अर्थपूर्ण संवाद स्थापित करने में असमर्थ रहता है। भ्रांतिया - चूँकि आॅटिज्म चिकित्सा विज्ञान में अपेक्षाकृत नई खोज है अतः लेते है । मंदबुद्धि एवं आॅटिस्टिक बच्चों के बीच का अंतर आॅटिस्टिक बच्चों के लक्षण को पढ़कर समझ जा सकता है। लक्षण- संवाद स्थापित करने की असमर्थता कि वजह से बच्चा सामाजिक सम्पर्क तथा वार्तालाप करने में असमर्थ रहता है। पुनरावृत्तिपूर्ण व्यवहार- इसका अर्थ है बच्चा एक ही प्रकार के शारीरिक किया जो की अर्थहीन है बार-बार करते रहता है। इसके परिणाम स्वरूप बच्चा सामान्य जीवन जीने के लिए आवश्यक सामाजिक व्यवहार एवं वार्तालाप के कौशल को विकसीत नहीं कर पाता।

 

 

इस प्रकार आत्मनिर्भर ना बन पाने की वजह से वह अपने दैनिक कार्यो के लिए दूसरों पर आश्रित रहता है आॅटिज्म शिशु विकास के महत्वपूर्ण पायदान आँख मिलाना-आई कांटेक्ट नहीं कर पाते वे ना तो लोगों की ओर ध्यान केंद्रित करपाते है ना ही मुस्कुराते है और ना ही आवाज के प्रति कोई प्रतिक्रिया देते है। उम्र के साथ बढ़ने पर भी ये बच्चे सामाजिक समझ को प्रदर्शित नहीं कर पाते जैसे कि हँसने डाॅटने डराने एवं नाम पुकारे जाने पर कोई अर्थपूर्ण प्रतिक्रिया नहीं दे पाते है। वार्तालाप में असमर्थता कि वजह से उम्र बढ़ने के साथ इन बच्चों के शब्दकोष में वृद्धि नहीं हो पाती वे अपनी भावनाओं को उचित शब्दों की पुनरावृत्ति करते है। चूँकि ये बच्चे एकाग्रषित भी नहीं हो पाते अतः शैक्षणिक विकास अवरूद्ध रहला है। कारण -आॅटिज्म के किसी एक मूलभूत कारण की खोज नहीं हो पाई हैं। जीन्स में होने वाला म्युटेशन एवं संभावित कारण है। आॅटिज्म का एक मजबूत आनुवांषिक आधार होता है। होम्योपैथी है किस तरह कारगर -आॅटिज्म का 100 प्रतिशत इलाज संभव नहीं है। इस स्थिति में उपचार मुख्य रूप से बच्चे को आत्मनिर्भर बनाने की ओर केन्द्रित रहता है। ऐसी स्थिति में होम्योपैथी अत्यंत कारगर है, चुंकि होम्योपैथी में व्यक्तित्व विशेषता के आधार पर चिकित्सा की जाती है। अतः यह आॅटिज्म के मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। इससे बच्चे के मस्तिष्क के उच्च केन्द्र जो कि सोचने और समझने का कार्य करते है में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। बच्चे व्यक्तित्व में पाये जाने वाले विशेष लक्षणों के आधार पर दवा का चुनाव किया जाता है। इसके अतिरिक्त बच्चे को पूर्व में हो चुंकि बिमारियाँ तथा परिवार में पाई जाने वाली किसी भी आनुवांशिक बीमारी का भी आंकलन किया जाता है। इस प्रकार चुनी दवा के जब उचित पोटेंसी तथा बार-बार दिया जाता है तब वांछित परिणाम अवश्य प्राप्त होते है। इस स्थिति में सामान्यतः उपयोगी दवाएँ - बेलाडोना, स्टामोनियम, ट्युबरकुलिनम आदि है।

 

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